Essay Writing Techniques in Hindi | Nibandh Kaise Likha Jata Hai

निबंध लिखने का सही तरीका क्या है

‘निबंध’ OR Essay शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- नि+बंध, इसका अर्थ है उचित ढंग से बंधी हुई रचना अर्थात ऐसी रचना जो विचारपूर्वक, क्रमबद्ध तरीके से लिखी गई हो। किसी विषय का वर्णन जब सीमित शब्दों में किया जाता है, तो ऐसी रचना को निबन्ध कहते हैं। अंग्रेजी में इसे Essay कहते है। निबन्ध लेखन हिन्दी की महत्त्वपूर्ण विद्या है। स्कूल, कॉलेज तथा विश्वविद्यालय की लगभग प्रत्येक परीक्षा में निबन्ध पूछा जाता है। अधिकांशतः छात्र पाठ्य पुस्तकों पर अधिक ध्यान देते हैं, तथा निबन्ध जैसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न पर ध्यान नहीं देते। निबन्ध लिखना भी एक कला है। निबन्ध में हम अपनें विचारों को सीमित समय में क्रमबद्ध तरीके, सीमित शब्दों में तथा प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करते है| आईये जानते है, कि निबंध लिखनें का सही तरीका क्या है?

निबंध की परिभाषा

अपनी मानसिक भावनाओं अथवा अपने विचारों को संक्षिप्त रूप और नियन्त्रित ढंग से लिखना ‘निबन्ध’ कहलाता है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते है, कि किसी विषय पर अपने भावों को पूर्ण रूप से क्रमानुसार लिपिबद्ध करना ही ‘निबंध’ कहलाता है। निबन्ध लिखना भी एक कला हैं। निबंध को विषय के अनुसार छोटा या बड़ा अथवा विस्तृत रूप में लिखा जा सकता है। निबंध को प्रबंध, लेख आदि नामों से पुकारा जाता है। ssc calendar

निबंध के अंग

मुख्य रूप से निबंध के तीन अंग होते हैं, जो इस प्रकार है –

  • भूमिका- भूमिका निबंध के शुरुआत में एक अनुच्छेद में लिखी जाती है। भूमिका हमेशा प्रभावशाली होनी चाहिए है, अर्थात आपके लेख से पाठक को यह ज्ञात हो जाये कि आप किस विषय के बारें में जानकारी देने जा रहे है| जो कि पाठक को आगे पढ़ने के लिए प्रेरित कर सके।
  • विषय-विस्तार – इसमें तीन से चार अनुच्छेदों में विषय के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रकट किए जाते हैं। प्रत्येक अनुच्छेद में एक-एक पहलू पर विचार लिखा जाते है।
  • उपसंहार- यह निबंध के अंत में लिखा जाता है। इस अंग में निबंध में लिखी गई बातों को सार के रूप में एक अनुच्छेद में लिखा जाता है। इसमें संदेश भी लिख सकते है।

निबंध के प्रकार

निबंधों को कई भागों में बाँटा जा सकता है, जो इस प्रकार है  –

  • वर्णनात्मक: इस प्रकार के निबंधों में किसी स्थान, त्योहार, प्राकृतिक दृश्य, पर्य़टन स्थल, यात्रा, मेला, घटना आदि का वर्णन किया जाता है।
  • विवरणात्मक:  इस प्रकार के निबंधों में किसी विशेष घटना,संस्मरण, काल्पनिक घटनाओं आदि का वर्णन किया जाता है।
  • भावात्मक:  ऐसे निबंधों में मन में उपजने वालों भावों का भावपूर्ण वर्णन किया जाता है, जैसे- द्वेष, आलोचना, मित्रता, क्रोध, प्रेम आदि।
  • विचारात्मक: इस प्रकार के निबंधों में विचारों और तर्कों की प्रधानता रहती है। साहित्य, समाज, धर्म, दर्शन आदि विषयों का वर्णन लिखने वाला अपने दृष्टिकोण से करता है।
  • उक्ति या किसी कथन पर आधारित: ऐसे निबंधों में मुहावरे,लोकोक्ति या कोई प्रसिद्ध पंक्ति का कथन लेकर निबंध की रचना की जाती है जिसे कर भला तो हो भला, पर उपदेश कुशल बहुतेरे, दया धर्म का मूल है आदि। lekhpal

निबंध लिखने के लिए महत्वपूर्ण बातें

निबंध लिखना एक कला है, और निबंध लिखते समय हमें इन महत्वपूर्ण बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए, जो इस प्रकार है-

  • निबंध लिखनें की भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए।
  • शब्द सीमा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • विचारों की पुनरावृत्ति अर्थात दोहरानें से बचना चाहिए।
  • निबंध लिखने के बाद उसे पढ़िए और आवश्यकतानुसार आवश्यक सुधार कीजिए।
  • अच्छा निबंध लिखने हेतु अरे निबंध को कई टॉपिक अथवा हेडिंग में बांट लेना चाहिए. हर टॉपिक को बोल्ड और बड़े शब्दों में लिखकर हाईलाइट करना चाहिए|
  • भाषा संबंधी त्रुटियाँ दूर कीजिए।
  • वर्तनी शुद्ध होनी चाहिए।
  • विराम-चिह्नों का प्रयोग व्यवस्थित ढंग से किया जाना चाहिए।
  • कोई उपयुक्त कथन याद हो तो उसे यथास्थान जोड़ना चाहिए।

  निबंध लिखने का सही तरीका

किसी भी विषय पर निबंध लिखनें में सबसे पहला कार्य यह होता है, कि आप जिस विषय पर निबंध लिखनें जा रहे है, उसके बारें में आपको उचित जानकारी होनी चाहिए । उसके बाद किसी भी निबंध को लिखने के तीन प्रमुख चरण होते हैं|

  • प्रस्तावना या निबंध की भूमिका
  • निबंध का मुख्य भाग अथवा उसके विषय में जानकारी
  • उपसंहार या निष्कर्ष

1.प्रस्तावना या निबंध की भूमिका

सबसे पहले निबंध के विषय में अच्छी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। निबंध की प्रस्तावना के अंतर्गत हम निबंध में किस विषय में बताना चाहते है, संक्षेप में लिखते हैं। निबंध की प्रस्तावना की शुरुआत हम किसी भी प्रकार से कर सकते हैं, हम किसी लेखक या कवि द्वारा लिखी गई बातों को शामिल कर सकते हैं। कभी कभी हम उस विषय के बारे में प्रश्नवाचक चिह्न लगाकर हम भूमिका की शुरुआत करते है, अर्थात हम प्रस्तावना में पूछते है कि आखिर ऐसा क्यों है और बाकी निबंध को हम उस प्रश्न के उत्तर के रूप में लिखते जाते हैं। इस प्रकार निबंध की प्रस्तावना एक प्रकार से नींव तैयार करती है, कि निबंध में क्या वर्णन किया जाएगा।

2.निबंध का मुख्य भाग अथवा उसके विषय में जानकारी

द्वितीय चरण निबंध लेखन का मुख्य भाग होता है, इसमें हम जिस विषय के बारें में लिख रहे है, उसके बारे में एक साथ पूरा वर्णन ना करके छोटे छोटे पैराग्राफों में निबंध को विभाजित कर देते हैं। जिसके कारण लेख में रोचकता बनी रहती है, और पाठकों के अन्दर आगे पढ़नें का उतसाह बढ़ता है। इस भाग में हमें इस बात पर ध्यान देना होता है, कि सभी तथ्यों को साथ न लिखा जाए| इसके लिए क्रम से एक एक व्याख्या करते हुए हमें आगे बढ़ना चाहिए जिससे कि हम जिस विषय में लिख रहे है उसके सभी मुद्दे कवर हो जाएं। साथ ही इस भाग में लोकोत्तियों, प्रसिद्ध लेखकों, कवियों या महापुरुषों बातों को शामिल करके निबंध की प्रामाणिकता को बढ़ा सकते हैं।

3.उपसंहार या निष्कर्ष

किसी भी निबंध के अंतिम भाग को लिखना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। उपसंहार अर्थात इस भाग में निबंध का सारांश को लिखना होता है। इसके साथ ही उपसंहार अर्थात निष्कर्ष को हमेशा भविष्य को लेकर लिखना चाहिए अर्थात यह समस्याओं के समाधान के रूप में होना चाहिए। उपसंहार एक तरह से निबंध को दिशा देता है, कि जिस विषय पर निबंध लिखा गया है उसका भविष्य में क्या आंकलन हो सकता है।